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बुधवार, 17 दिसंबर 2014

गणेश मानस पूजा


(२५.) प्रार्थना एवं जप- 
इसके पश्चात् मैं गणेशजी के सुंदर मुस्कुराते हुए मुखारविंद की ओर टकटकी लगाकर देखता हुआ उनके सुंदर नामों एवं मंत्रों का उच्चारण कर रहा हूँ, यथा- ‘गं गणपतये नम:’, ‘श्री गणेशाय नम:’, ‘गणपति बप्पा मोरया- मंगलमूर्ति मोरया’ इत्यादि 




श्रीगणेश भगवान् इन नामों को मेरे मुख से श्रवण कर मंद-मंद मुस्कुरा रहे हैं



Ganesh Manas Puja 25. Prayer & name chanting of Ganesha 
गणेश मानस पूजा


(२४.) स्तोत्र स्तुति- 
हे करुणावतार! मैं आप चतुर्भुजधारी श्रीगणेश का ध्यान करता हूँ, जो त्रिनेत्र और एकदंत हैं, गजमुख और लंबोदर हैं, सर्प का यज्ञोपवीत धारण किए हुए हैं, जिनके चरणकमलों की असंख्य देवगण वंदना कर रहे हैं, जो अपनी अतिसुंदर मुख वाली पत्नियों ऋद्धि एवं सिद्धि के संग मुस्कुराते हुए स्वर्ण के सिंहासन पर विराजमान हैं। 

जिनके दाएँ हाथ में परशु है, और दूसरा दायाँ हाथ अभय मुद्रा में है, जिसमें ॐ अंकित है और जिसमें से कृपा की किरणें निकलकर मेरे ऊपर बरस रही हैं। 


गणेशजी के प्रथम बाएँ हाथ में कमल पुष्प एवं पाश है और दूसरे बाएँ हाथ में मधुर मोदकों का थाल है। 


ऐसे श्रीगणेशजी की अनुपम मंगलमय रूपमाधुरी का अपने नेत्रों के दोनों से पान करता हुआ मैं उनकी स्तुति करता हूँ।  



Ganesh Manas Puja 24. Ganesha Stotra & Stuti 

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