वीणा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वीणा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 17 दिसंबर 2014

गणेश मानस पूजा

(३८.) देव मंदिर –पूजा, सत्संग एवं ग्रंथ श्रवण, संकीर्तन- 
श्रीगणेश रथ से लौटकर अपने माता–पिता गौरीशंकर के चरणों में प्रणाम कर रहे हैं, और पूरे परिवार के संग मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। वे सीताराम जी को प्रणाम कर रहे हैं और उन्हें पुष्पमालाएँ पहना रहे हैं। 


वहाँ बाल्मीकि के मुख से रामायण और व्यासजी के मुख से भागवत का श्रवण कर अपने नेत्रों से प्रेमाश्रु बहा रहे हैं। गणेशजी अपने ईष्टदेव के विरह में रुदन कर रहे हैं।



इसके पश्चात् संकीर्तन प्रारंभ हो गया है। शिवजी अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के संग भगवान् के मधुर और पवित्र नामों का उच्चारण करते हुए धिमिक-धिमिक-धिम धिमिक-धिमिक-धिम नृत्य कर रहे हैं। 

गणेशजी के गले में हारमोनियम है और वे उसे बजाते हुए झूम रहे हैं। 



कार्तिकेयजी के हाथों में ढोलक है और वे मधुर ताल में उसका वादन कर रहे हैं। शिवजी के एक हाथ में त्रिशूल है, जिसमें नाग और रुद्राक्ष की मालाएँ झूल रही हैं और उनके दूसरे हाथ में डमरू है, जिसे वे डम-डम डम-डम बजा रहे हैं। 


ऋद्धि-सिद्धि अपनी सासू माँ पार्वती संग वीणा, मृदंग बजाते हुए भगवन्नाम के सुंदर गीत गा रही हैं। 




नारद, तुंबरू, ब्रह्मा, विष्णु, ऋषि-मुनि, गंधर्व-अप्सरा भी इस दृश्य को देखकर भावविभोर और रोमांचित हो रहे हैं और वे भी संकीर्तन में भाग लेने के लिए शिव-परिवार के पास चले आए हैं। 




Ganesh Manas Puja 38. Devotee Ganesha 
गणेश मानस पूजा

(३४.) नौकाविहार लीला- 
हे विघ्ननाशक गणेश! आइये! अब तनिक नौका विहार का आनंद लीजिए गणेश गंगा में खड़ी एक सुंदर नौका की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। गणेशजी के पीछे-पीछे ऋद्धि एवं सिद्धि भी सुंदर वस्त्राभूषण पहने अपनी नूपुरों से रुनझुन का मधुर शब्द गुँजायमान करती हुईं उनका अनुसरण कर रही हैं।


मैंने नौका को रंग-बिरंगे फूलों से सजा दिया है और बैठने के स्थान पर सुंदर मखमल बिछाई है। मैं चप्पू उठाता हूँ और नौका गंगा की धारा में धीरे-धीरे बहने लगती है।


नौका पर हंस के सुंदर डिजाईन हैं और गौरीशंकर की सुंदर मूर्ति विराजमान है। 


मूर्ति के आगे गणेशजी ने घी के अनेक दीपक प्रज्ज्वलित कर दिए हैं, जिनका प्रतिबिंब और प्रकाश गंगा के जल में पड़ता हुआ अत्यंत सुंदर लग रहा है। गणेशजी मूर्ति के सम्मुख वीणा बजाते हुए मधुर स्वर में गायन कर रहे हैं।

नौका में ऋद्धि एवं सिद्धि के संग बैठे हुए श्रीगणेश भगवान् अत्यंत ही सुंदर लग रहे हैं। ऋद्धि-सिद्धि गणेशजी को चँवर ढुला रही हैं और गणेशजी मुस्कुराते हुए अपने हाथों में कमल का पुष्प घुमा रहे हैं गंगा के तट पर स्थित वृक्ष नौका में बैठे गणेशजी के ऊपर पुष्पों की वृष्टि कर रहे हैं।


मैं गणेशजी की प्रशंसा में एक गीत गाने लगता हूँ, जो हवा में गूँजने लगा है। नौका विहार करते गणेशजी का सुंदर प्रतिबिंब गंगा के निर्मल जल में चमक रहा है। सुगंधित मलय-समीर बहने लगी है सारस, हंस, बत्तख आदि जलचर गणेशजी के दर्शनों हेतु लहरों से ऊपर आ गए हैं और उनके सौंदर्य का अपने नेत्रों से पान कर रहे हैं 


ऋद्धि-सिद्धि गंगा में खिले कमल के पुष्पों को तोड़कर उन्हें अपने पति श्रीगणेशजी के चरणों में अर्पित कर रही हैं और उन पुष्पों की मालाएँ बनाकर प्रेमपूर्वक गणेशजी के कंठ में पहना रही हैं 

नीले आकाशमंडल से देवगण नौका में ऋद्धि-सिद्धि सहित विराजमान गणेश पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं। 



Ganesh Manas Puja 34. Ganesha Boat Riding 

मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

गणेश मानस पूजा


(२२.) वादन- 
हे संगीतप्रिय गणेश! आपकी प्रशंसा में नारद जी मधुर स्वर से वीणा वादन कर रहे हैं और गंधर्वों के समूह मृदंग, ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, शंख, हारमोनियम, तबला, शहनाई, पियानो, ढपली इत्यादि वाद्ययंत्र बजाते हुए कर्णप्रिय गीतों का गान कर रहे हैं 





गंगा की लहरें भी इस संगीत को सुनकर थिरक-थिरककर नृत्य कर रही हैं


Ganesh Manas Puja 22. Playing musical instruments for Ganesha (Vaadan)

Translate