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बुधवार, 17 दिसंबर 2014

गणेश मानस पूजा

(३४.) नौकाविहार लीला- 
हे विघ्ननाशक गणेश! आइये! अब तनिक नौका विहार का आनंद लीजिए गणेश गंगा में खड़ी एक सुंदर नौका की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। गणेशजी के पीछे-पीछे ऋद्धि एवं सिद्धि भी सुंदर वस्त्राभूषण पहने अपनी नूपुरों से रुनझुन का मधुर शब्द गुँजायमान करती हुईं उनका अनुसरण कर रही हैं।


मैंने नौका को रंग-बिरंगे फूलों से सजा दिया है और बैठने के स्थान पर सुंदर मखमल बिछाई है। मैं चप्पू उठाता हूँ और नौका गंगा की धारा में धीरे-धीरे बहने लगती है।


नौका पर हंस के सुंदर डिजाईन हैं और गौरीशंकर की सुंदर मूर्ति विराजमान है। 


मूर्ति के आगे गणेशजी ने घी के अनेक दीपक प्रज्ज्वलित कर दिए हैं, जिनका प्रतिबिंब और प्रकाश गंगा के जल में पड़ता हुआ अत्यंत सुंदर लग रहा है। गणेशजी मूर्ति के सम्मुख वीणा बजाते हुए मधुर स्वर में गायन कर रहे हैं।

नौका में ऋद्धि एवं सिद्धि के संग बैठे हुए श्रीगणेश भगवान् अत्यंत ही सुंदर लग रहे हैं। ऋद्धि-सिद्धि गणेशजी को चँवर ढुला रही हैं और गणेशजी मुस्कुराते हुए अपने हाथों में कमल का पुष्प घुमा रहे हैं गंगा के तट पर स्थित वृक्ष नौका में बैठे गणेशजी के ऊपर पुष्पों की वृष्टि कर रहे हैं।


मैं गणेशजी की प्रशंसा में एक गीत गाने लगता हूँ, जो हवा में गूँजने लगा है। नौका विहार करते गणेशजी का सुंदर प्रतिबिंब गंगा के निर्मल जल में चमक रहा है। सुगंधित मलय-समीर बहने लगी है सारस, हंस, बत्तख आदि जलचर गणेशजी के दर्शनों हेतु लहरों से ऊपर आ गए हैं और उनके सौंदर्य का अपने नेत्रों से पान कर रहे हैं 


ऋद्धि-सिद्धि गंगा में खिले कमल के पुष्पों को तोड़कर उन्हें अपने पति श्रीगणेशजी के चरणों में अर्पित कर रही हैं और उन पुष्पों की मालाएँ बनाकर प्रेमपूर्वक गणेशजी के कंठ में पहना रही हैं 

नीले आकाशमंडल से देवगण नौका में ऋद्धि-सिद्धि सहित विराजमान गणेश पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं। 



Ganesh Manas Puja 34. Ganesha Boat Riding 

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